अकोला:- ये देश रणदीप हुड्डा का आभारी रहेगा। सावरकर मूवी को पहले मराठी मानुष महेश मांजरेकर डायरेक्ट कर रहा था और ऐसी झोल वाला स्क्रिप्ट रखा था जिससे जावेद अख़्तर, नसीरुद्दीन शाह, भट्ट ख़ान गैंग वगैरह नाराज़ ना हो पाए।
हुड्डा ने मूवी साइन करने के बाद सावरकर का पूरा इतिहास ए टू जे़ड पढ़ा। हुड्डा को मराठी मानुष मांजरेकर की दी हुई स्क्रिप्ट पसंद नहीं आयी। उसने कहा सावरकर को हम ऐसे फालतू पोट्रेट नहीं कर सकते। सब कुछ रियल होना चाहिए।
मराठी मानुष मांजरेकर ने हुड्डा को बोला कि तब तू अपने अनुसार बना ले, मेरे को अपना हुक्का पानी बंद नहीं कराना।
मराठी मानुष मांजरेकर सेट छोड़ भाग गया। मांजरेकर को भागते देख मूवी का प्रोड्यूसर भी भाग गया।
अब बच गया हरियाणवी जाट भाई हुड्डा। उसने सावरकर का महीनों से बहुत गहराई से स्टडी किया हुआ था। उसने ठान लिया कि मैं ही इसे पूरा करूंगा। चाहे प्रोड्यूस करना हो, ख़ुद ही डायरेक्शन से ले के एक्टिंग करना हो।
हुड्डा के साथ पैसे की समस्या थी क्योंकि मूवीज़ में काम भी बहुत कम ही करता था। तो हरियाणा में अपने बापू के पास गया और कहा बापू सावरकर जी पर मूवी बनानी ही बनानी है पर प्रोड्यूसर भाग गया है, और इतना पैसा भी नहीं है।
हुड्डा का बाप सुपर जाट बोला, रे तैने ओखली में सर दे ही मारा है तो मूसल से क्या डरना?
अगले दिन घर खेती बाड़ी के सारे कागज़ात मार्किट में दे के पैसे उठा लिया और हुड्डा को दे दिया कि जा बना ले सावरकर जी पर मूवी।
ये फिल्म 22 मार्च को रिलीज़ हो रही है जिसमे रणदीप हुड्डा ने अभिनय के साथ ही उन्होंने लेखन, निर्देशन और सहनिर्माण भी किया है।
देश के महान क्रांतिकारी वीर सावरकर पर बनी इस फिल्म को ज़रूर ज़रूर देखें और अपनी नई पीढ़ी को भी दिखाएं ताकि देश इस अमर बलिदानी को जान सके जिसे एक परिवार ने गुमनामी में धकेल दिया।
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